प्रकृति के गर्भ में अपने जन्म की प्रतीक्षा में एक चिरपंथी की प्रार्थना ...
Wednesday, October 28, 2020
हे आदिशक्ति! हे जगजननी!
Tuesday, October 27, 2020
दृष्टा
Tuesday, October 6, 2020
सॉरी बापू
Tuesday, August 18, 2020
Monday, August 17, 2020
शबरी
Sunday, August 9, 2020
मैं बैरी सुग्रीव पियारा?
कई शताब्दियों के वनवास के पश्चात और तमाम आसुरी प्रवृत्तियों को परास्त कर अंततः प्रभु श्रीराम अयोध्या लौट आए हैं। बाली का आहत हुआ अहंकार आज भी मन ही मन फिर वही प्रश्न कर रहा होगा। परंतु श्रीराम का उत्तर तो हर युग में वही होगा, क्योंकि सत्य तो कहा ही उसको जाता है, जो किसी भी देश काल परिस्थिति में अपरिवर्तनीय है।
Friday, July 31, 2020
काव्यमदूत - आह-कवि जालीदासों को समर्पित
केवल कवियों को ही प्राथमिकता"
अखबार में ये विज्ञापन पढ़कर मैं चौंका
ये सत्य है या केवल आँखों का धोखा?
मैंने आंखों को मला, फिर से पढ़ा, यही सच था
आगे जो लिखा था वो और भी "टू मच" था
मृत्युलोक से यमलोक की 86000 योजन की दूरी है
और लंबी यात्रा में मनोरंजन भी जरूरी है
छोड़ो सारे किंतु, परंतु, अगर, मगर, पर
बेरोजगारी के दौर में नहीं मिलेगा ये अवसर
इसलिए आज ही ऑनलाइन अप्लाई कीजिये
योग्यता कोई नहीं, बस कवि होने का प्रमाण दीजिये
मैंने श्रीमती जी को आवाज़ लगाई
भाग्यवान, क्या मैं भी आएं बाएं अल्लम गल्लम बकता हूँ?
बताओ क्या मैं भी आधुनिक काल का कवि लगता हूँ?
उनकी सहमति पाकर मेरा कॉन्फिडेंस जागा
और मैं मनीष तिवारी जी के घर की ओर भागा
अपनी भड़ास का ये जो नित्य वमन करते हो
सुना है तुम भी ऑनलाइन कविता पढ़ते हो
एक से भले दो होते हैं, ये बात बुजुर्ग बताते हैं
चलो हम दोनों मिलकर ये दायित्व उठाते हैं
अगले ही दिन हम इंटरव्यू की लाइन में खड़े थे
देखा तो वहां बड़े बड़े दिग्गज पहले से पड़े थे
चित्रगुप्त बता रहे थे कि
कोरोना के कारण यमपुरी में फुल हैं समस्त सीटें
समझ में नहीं आ रहा अब पापियों का कहाँ पीटें
एक बार सेवा का यह अवसर तो दीजिये
जिंदों को सताया है, ये मृतक क्या चीज है
यहाँ सभी चित्रगुप्त के मैनेजमेंट के कायल हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है, नए यमदूत बहुत होनहार हैं
आपने साहित्यकारों को नहीं, सही-हत्याकारों को चुना है
बाकी सब तो थोथा चना बाजे घना हैं
इनके हत्थे जो भी चढ़ेगा, स्वर्ग का पात्र हो जाएगा
अपने पापों के लिए वो हज़ार बार पछतायेगा
इस जनम की छोड़िए, अगले जन्म की एडवांस सजा पायेगा
क्योंकि यहां तक आते आते वो कई बार मर जायेगा
© - प्रशांत सेठ
Sunday, June 21, 2020
मैं अज्ञानी अधजल गागर - गुरु प्रार्थना
Friday, June 19, 2020
हम बहुत याद आएंगे
Wednesday, May 13, 2020
कुकुरतंत्र
Monday, May 11, 2020
माँ तुझे सलाम
Wednesday, May 6, 2020
मद्य-प्रीति
Monday, April 27, 2020
बुद्धम शरणं गच्छामि। धम्मं शरणं गच्छामि। संघं शरणं गच्छामि।
Wednesday, April 22, 2020
प्रेम गली अति सांकरी ...
Friday, April 17, 2020
अनुरागी
Wednesday, April 8, 2020
शर्म निरपेक्ष
तबलीगियों, जिहादियों के समर्थक एक कलम के बेईमान शायर को समर्पित मुक्तक ...
बहर में लिख लिख के बहरे हो गए
आदमी के कितने चेहरे हो गए
मरहूम यूँ इंसानियत भी हो गई
अल्फ़ाज़ पे मज़हब के पहरे हो गए
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और ये सच्चे मगर मौन सेक्युलरों को चेतावनी भी, क्योंकि वो नहीं जानते वो क्या नहीं कर रहे। छद्म और एक-पक्षीय सेक्युलरों को कोई चेतावनी नहीं, क्योंकि वो हमेशा से जानते हैं वो क्या कर रहे हैं ...
नफरत फैली, तो आएंगे ज़द में सच्चे भी
बहन बेटी माँ बूढ़े जवां और बच्चे भी
रोक लो तुम खुद ही वहाँ मज़हबी जहालत
इधर मज़हबी ना हो जाएं कई अच्छे भी
© - प्रशांत सेठ
Tuesday, March 31, 2020
उसकी चिट्ठी
Thursday, March 26, 2020
कोरोना और सनातन वैदिक परम्पराएं - क्वारंटाइन बनाम सूतक - 3
Wednesday, March 25, 2020
कोरोना और सनातन वैदिक परम्पराएं - प्रशासनिक लक्ष्मण रेखा - 2
Tuesday, March 24, 2020
कोरोना और सनातन वैदिक परंपराएं - तर्क और विश्वास/अंधविश्वास
Sunday, March 22, 2020
कर्फ्यू
Wednesday, March 18, 2020
अहिल्या
Sunday, March 8, 2020
प्रियतमा
Thursday, February 27, 2020
एक राष्ट्र की मौत
जो जन्म लेता है







