44 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर मुकुंद वरदराजन आज शोपियां (कश्मीर) में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए। आपकी शहादत को हज़ार बार नमन
भारत की तुम सच्ची संतान
हे वीर तुम्हें सहस्त्र प्रणाम
जिस माँ के लाल हो तुम
ऋणी है उसका हिंदुस्तान
देख रहा हूँ सजल नेत्र से
मन पटल पर अमर बलिदान
चिरनिद्रा में जाने के पहले
अंतिम तुम्हारा वह संग्राम
देह तुम्हारी टूट रही है
अधरों पर किन्तु है मुस्कान
और माटी से कहा तुमने
आज न्योछावर तुझ पर प्राण
हौले से पूछ रही धरती है
छोड़ चले तुम क्यों मैदान
युद्ध जी कर जीते जाते हैं
इस सत्य से क्या तुम हो अंजान
हंसकर तुमने कहा उससे है
मेरी किस्मत बड़ी बलवान
माँ की गोद में जन्म लिया है
गोद से ही करूँगा प्रयाण
फिर धरती ने चूमा तुमको
और बाहों में लिया है थाम
सेज बन गयी गोद उसकी
चादर बन गया आसमान
एक बूँद निकल आँखों से
कर गयी अंतिम प्रणाम
और तुमने मूँद ली आँखें
अब देह हो चली निष्प्राण
कर्त्तव्य की बलिवेदी पर
कर दिया जीवन बलिदान
उस राष्ट्र का क्या कोई अनिष्ट करेगा
जहाँ तुम जैसे हों वीर जवान
© - प्रशांत सेठ