एक नया अंदाज़-ए-गुफ्तगू
"रिश्ते"
रिश्तों के समंदर में, उतर जाओ मगर यूँ
भीगे भी रहो साहब, तुम डूबो भी नहीं
"जिंदगी"
जिंदगी के हर सितम को, सह जाओ इस तरह
खामोश ना रहो ठीक, तुम चीखो भी नहीं
"सियासत"
हालात हैं ऐसे इस, दौर-ए-सियासत में
खुलती नहीं आँखें अगर, तुम मींचो भी नहीं
"बुराई"
ये माना के हर तरफ, पाप है बुराई है
कटे ना ये शज़र तुमसे, तो सींचो भी नहीं
"फासला"
इतनी ही पसंद हमको, दूरी-ए-दरमियाँ
थामे भी रहो बाँहों में, तुम भींचो भी नहीं
"आँसू"
एहसास की सीपें हैं, दिल की गहराई में
आँसू ना सहेजो मगर, तुम बेचो भी नहीं
"गुफ्तगू"
सीखना चंद लफ़्ज़ों में, कहना सुनना "सेठ"
वक़्त-ए-जिंदगी कम है, तुम खींचो भी नहीं
© - प्रशांत "सेठ"
"रिश्ते"
रिश्तों के समंदर में, उतर जाओ मगर यूँ
भीगे भी रहो साहब, तुम डूबो भी नहीं
"जिंदगी"
जिंदगी के हर सितम को, सह जाओ इस तरह
खामोश ना रहो ठीक, तुम चीखो भी नहीं
"सियासत"
हालात हैं ऐसे इस, दौर-ए-सियासत में
खुलती नहीं आँखें अगर, तुम मींचो भी नहीं
"बुराई"
ये माना के हर तरफ, पाप है बुराई है
कटे ना ये शज़र तुमसे, तो सींचो भी नहीं
"फासला"
इतनी ही पसंद हमको, दूरी-ए-दरमियाँ
थामे भी रहो बाँहों में, तुम भींचो भी नहीं
"आँसू"
एहसास की सीपें हैं, दिल की गहराई में
आँसू ना सहेजो मगर, तुम बेचो भी नहीं
"गुफ्तगू"
सीखना चंद लफ़्ज़ों में, कहना सुनना "सेठ"
वक़्त-ए-जिंदगी कम है, तुम खींचो भी नहीं
© - प्रशांत "सेठ"
