Sunday, June 21, 2020

मैं अज्ञानी अधजल गागर - गुरु प्रार्थना

मैं अज्ञानी अधजल गागर
गुरुवर तुम हो ज्ञान का सागर
धन्य जीवन है तुमको पाकर
श्री चरणों की शरण में आकर

ज्ञान दीप हृदय में जलाकर
दृष्टि दो अंधकार मिटाकर
तुम से आलोकित है ये जीवन
सूर्य से जैसे रहता सुधाकर

घट श्वासों का रीत रहा है
राह दुर्गम है थाम लो आकर
तृष्णा में संसार की डूबे
मेरे मन को उबारो प्रभाकर

ध्येय तुम हो और मार्ग भी तुम
तुम ही नैया हो तुम ही सागर
जो डूबा वो पार हुआ है
स्नेह सिंधु में डुबकी लगाकर

© - प्रशांत सेठ

Friday, June 19, 2020

हम बहुत याद आएंगे

शौर्य पथ पर बलिदानों की
गाथा हम लिख जाएंगे
तुम्हारे नयन अश्रु भी तब
श्रद्धा सुमन बन जाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...

सर उठाकर जीने की भी
शर्त यही बतलाते थे
हमसे पहले जो गए वो
गीत यही तो गाते थे

यह पथ है स्वाभिमान का
यहां पर सर कट जाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...

भारी उनकी संगीनों पे
फौलादी ये सीना था
तुम्हें अमृत पिलाने को
हमको विष तो पीना था

घाव वीरों की छाती के
पुष्प को भी लजाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...

नहीं सिर्फ सीमा के रक्षक
स्वप्नों के रखवाले हैं
जल गई दीपक की बाती
तभी तो ये उजाले हैं

ओस की बूंदें बनकर हम
सुबह सुबह जब आएंगे ...
हम बहुत याद आएंगे

© - प्रशांत सेठ