शौर्य पथ पर बलिदानों की
गाथा हम लिख जाएंगे
तुम्हारे नयन अश्रु भी तब
श्रद्धा सुमन बन जाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...
सर उठाकर जीने की भी
शर्त यही बतलाते थे
हमसे पहले जो गए वो
गीत यही तो गाते थे
यह पथ है स्वाभिमान का
यहां पर सर कट जाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...
भारी उनकी संगीनों पे
फौलादी ये सीना था
तुम्हें अमृत पिलाने को
हमको विष तो पीना था
घाव वीरों की छाती के
पुष्प को भी लजाएंगे
हम बहुत याद आएंगे ...
नहीं सिर्फ सीमा के रक्षक
स्वप्नों के रखवाले हैं
जल गई दीपक की बाती
तभी तो ये उजाले हैं
ओस की बूंदें बनकर हम
सुबह सुबह जब आएंगे ...
हम बहुत याद आएंगे
© - प्रशांत सेठ

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