Saturday, May 14, 2016
भीष्म-द्वन्द
Thursday, May 12, 2016
एक दिन माँ
उस दिन बहुत खुश हो गई माँ
#हैश टैग के सहारे ट्वीट हो गई
और वॉट्सएप्प पर वायरल भी
फेसबुक पर उमड़ा मातृ प्रेम
लाइक्स और कमेंट्स में
सहेज रहा था अपना अस्तित्व
कुछ बटोरी हुई भावनाओं के साथ
"माँ" हो गई थी अपडेट
पोस्ट हो गई थीं तस्वीरें
हर बार की तरह
इस वर्ष भी
श्रवण कुमार की फेसबुक वॉल पर
हर तरफ माँ-मयी डिजिटल मंज़र
सिर्फ और सिर्फ श्रवण कुमार
टीपे हुये ढेर सारे भाव
वॉट्सएप्प से फेसबुक के बीच
"माँ" होती रही उस दिन
कट कॉपी और पेस्ट
मैं सोच रहा हूँ
उस दिन माँ ने फिर दर्द सहा होगा
उतना ही, जितना कि जब तुम जन्मे थे
नहीं, बल्कि थोडा अधिक ही
क्योंकि इस बार तुम पैदा हुए थे
कुछ कुछ मरे हुये
काश तुम्हारा जन्म भी डिजिटल होता
और माँ रहती प्रसव की वेदना से मुक्त
या टीप लाती वो तुम्हें
किसी सरोगेट मदर से
और चिपका देती स्टेटस की तरह
घर की दीवार पर
साल में एक दिन बदलती तुम्हारा डायपर
और उस दिन को कहा जाता "सन डे"
संडे वो नहीं, जो बावन होते हैं हर साल में
सन डे यानि पुत्र दिवस
जब माँ करती पोस्ट कुछ तस्वीरें
"आज मैंने छोना बेबी का डायपर बदला, मुआआआआह्"
काश तुम्हारे शब्द ही तुम्हारे अपने होते
तो तुम्हें मालूम होता
कितना कठिन है
अपनी कलम से सृजन करना
ह्रदय की कोख से
भावों को जन्म देना
मुक्त कर दो माँ को
और खुद को भी
इन एक दिवसीय छद्म भावनाओं से
आज तुम सिर्फ एक शब्द लिख दो
"माँ"
और कृतज्ञता से देख लो उसकी तरफ
और यदि माँ सिमट गई हो
किसी फोटो फ्रेम में
तो उसकी तस्वीर से ही कह दो
"माँ"
देखना, इधर तुम्हारी आँख में बूँद होगी
उधर उसकी छाती में फिर सागर हिलोरें लेगा
उसकी आँखों से छलकेगा वात्सल्य
उसकी कोख फिर गर्व से भर जायेगी
और यकीन मानो,
तुम्हारी मूक कृतज्ञता से
आज मातृत्व सम्पूर्ण हो जायेगा !!!
© - प्रशांत सेठ
