विवाह करना और निभा ले जाना किसी योग से कम नहीं होता। इसलिये सभी शादीशुदा महायोगियों को योग दिवस की बधाई।
इसे सिर्फ हास्य ना समझो
अनुभव सिद्ध प्रयोग मानो
हम गृहस्थ धर्म के पालक हैं
हमको भी महायोगी जानो
"एक गृहस्थ का योग दिवस"
कुंवारेपन की अकड़ धरी रहती सारी है
पुरुष के अहम् का निदान ही नारी है
देह ही नहीं, मन को भी कर देती लचीला है
पति नामक जीव पे भारी, पत्नी नामक महिला है
जब कभी पत्नी कोपभवन में जाती है
पेट पीठ मिलकर करते कपालभाति है
पत्नी समक्ष शरणागत आसन में रहते हैं
सुखी गृहस्थ सदैव शीर्षासन में रहते हैं
वाणी के ज्ञात हमें कई दुष्परिणाम हैं
घर में ऊँचे स्वर पर पूर्ण विराम है
वाणी के अधिक प्रयोग में ऊर्जा का ह्रास है
हमें मौन साधने का योगियों सा अभ्यास है
हाथ में थैला लिए जब सब्जी लेने जाते हैं
स्वयं को प्रकृति के निकट ही पाते हैं
झाड़ू बर्तन कपड़े, रोज़ का व्यायाम है
यही हमारे प्राणों का निश्चित आयाम है
नियमित आहार संग संयमित व्यवहार है
इच्छाओं का निर्गमन ही मोक्ष का द्वार है
हर श्वांस पर पत्नी का नियंत्रण पूर्ण है
गरिष्ठ विचारों के लिये, वो कायम चूर्ण है
स्वस्थ और सुन्दर काया के हम स्वामी हैं
क्योंकि पत्नी के हर कथन के अनुगामी हैं
उसी के हाथ है हमारी, इड़ा पिंगला नाड़ी
बैल समान खींच रहे हैं, गृहस्थी की गाड़ी
गले में सर्प सा लटकाये हम भी रहते हैं
गंगा सा प्रचंड वेग सर पर सहते हैं
शक्ति को साध रहे, अपनी सहनशक्ति से
महायोग को प्राप्त हुये, पत्नी की भक्ति से
© - प्रशांत सेठ