कभी देता है सफलता
कभी देता है वो ज्ञान
समय बुरा नहीं होता बंधु
तुम ही नहीं सके पहचान
लक्ष्य पाया है उन्होंने
पार गये जो विरोधों से
संकल्पों को मिलती दृढ़ता
जीवन में अवरोधों से
दोष ना देकर बाधाओं को
उनका भी करो सम्मान
समय बुरा .....
विफलता में छुपे सबक से
ज्ञान की बढ़ जाती पूँजी
कहीं द्वार जब बंद मिले तो
अनुभव ही बन जाता कुँजी
गिरकर उठना हर ठोकर पर
सफलता का यही सोपान
समय बुरा .....
लक्ष्य से नित घटती जाती
हर कदम के साथ दूरी
नहीं होती एक दिन में
किसी साधक की साध पूरी
त्रुटियों को छोड़कर पीछे
निखरते हैं चरित्र महान
समय बुरा .....
हताशा के घने तिमिर में
जलाये रहो आशा का दीप
धीरज से गढ़ पाती है
एक मोती कोई सीप
गहराई के बल पर वृक्ष
छू पाते हैं आसमान
समय बुरा .....
© - प्रशांत सेठ