मीडिया हो या बॉलीवुड, ये कुछ नहीं सिर्फ व्यापारी हैं। ये वही बेचते हैं जो हम खरीदते हैं। एक अदाकारा कैसे मरी या किसकी अदाओं पे ये देश मर रहा है, ये गंभीर सवाल हैं। सरहद पर कौन कब क्यों मर रहा है उसपर इतना संजीदा होने की क्या ज़रूरत है? ये सेलिब्रिटी नहीं होते। ये तो कुछ पागल होते हैं जिन्हें मुल्क से मोहब्बत हो जाती है। और पागलों के लिये कौन रोता है?
अहमक
ठुमकने पर, ठुनकने पर, ये मरते हैं इशारों में
ये ऐसा मुल्क है याँ लोग, मरते हैं अदाओं में
हिलाये भौहें कोई नाज़नीं, तो लाखों मर जायें
वो अहमक हैं जो मरते हैं, सरहद की वफाओं में
© - प्रशांत सेठ
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