आक्रोश, बुरा नहीं होता
जब जन्म लेता है
करुणा की कोख से,
तब पढ़ता है, निर्बलों की पीड़ा
पलता है, वेदना के आंसुओं पर
और अभिव्यक्त होता है
अन्याय के विरुद्ध
आक्रोश, बुरा है वही
जो जन्म लेता है
जो जन्म लेता है
अहंकार की कोख से,
तब पढ़ता है, स्वार्थ का गणित
पलता है, परजीवी की तरह समाज में
और अभिव्यक्त होता है
अनुशासन के विरोध में
बुरी नहीं होती
गैर मजहब की हर अभिव्यक्ति
बुरी है वही
जिसने जन्म लिया है
धर्मांधता और जिहाद की कोख से
जिसने तय कर रखे हैं मापदंड
दूसरों की आस्थाओं के
जिसे तकलीफ है, औरों के खुदा से
तभी तो
उधर तुम्हारी धर्मांधता हामला* है तो
इधर मेरी करुणा ने भी कर लिया है गर्भ धारण
और मृत्युशैया पर लेटा है
एक बूढ़ा राष्ट्र
पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में
© - प्रशांत सेठ
*हामला = गर्भवती