Saturday, February 8, 2020

आव्हान

वर्तमान का मौन कहीं ना, युगों युगों का हो संताप
मूक न रहना जब तुम्हारी,  सहिष्णुता पे हो आघात

आव्हान

पुष्प नहीं शोभित तुमको
शस्त्रों से सजना होगा
अब मुरली का काम नहीं
शंखों को बजना होगा

रोके ना वृन्दावन तुमको
टोके यमुना का तट नहीं
गोरी के कुंतल की काली
उलझाये ना लट कहीं

कर्तव्य की राह में मेरा
प्रेम कभी ना होगा बाधा
मैं शक्ति हूँ तेरी मोहन
बंधन कभी नहीं थी राधा

मुक्त प्रेम को कर बैठी तब
बरसाने की वह किशोरी
मुरलीधर के हाथ थमाकर
संकल्पों की पावन डोरी

त्याग रहित प्रेम हुआ तो
कंसों का वध ना होगा
अब मुरली का काम नहीं
शंखों को बजना होगा

2
मुड़ मुड़ के वो देख रहा
दुविधा में क्यों पग उसके?
रोक रहे रणबांकुरे को
प्रणय निवेदन ये किसके?

हाड़ा वंश की वह तरुणी
कह उठी तब प्रियतम से
बलिदानों की राह पे चलना
मोह ना रखना अब हमसे

क्षत्राणी का प्रेम कभी ना
रोके तुमको निज धर्म से
शीश अपना भेज रही हूँ
प्रिय, विमुख ना हो कर्म से

रहें सतीत्व पौरुष सहगामी
लज्जित धर्म ध्वज ना होगा
पुष्प नहीं शोभित तुमको
शस्त्रों से सजना होगा

3
सुनो हिन्द की ऐ तरुणाई
तुमपर धरा को रंज ना हो
जिसने तुमको जन्म दिया
उस माँ पर अब तंज ना हो

क्षीरसागर के सुख तभी तक
जब ताण्डव की क्षमता हो 
है वैभव संग शक्ति उसकी
जिसका लहू उबलता हो

करुणा के नेत्रों से छलके
क्रोध के फिर भरे कलश क्यों?
मानवता की जननी अब ना
काली बनने को विवश हो

प्रेम प्राण रस रंग के सारे
मोहों को तजना होगा
पुष्प नहीं शोभित तुमको
शस्त्रों से सजना होगा

© - प्रशांत सेठ

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