आज नागपंचमी पर शुभकामनाओं सहित पंजाब और उत्तर प्रदेश के भावी चुनावों को समर्पित एक "Nag punch me" स्पेशल पंच।
विषधर भाई
साँप को दूध नहीं पिलाओगे??
बाहर से आवाज़ आई
दरवाज़ा खोला तो खड़े थे विषधर भाई
हमने डरते डरते सोचा, कोई ना कोई बात है ज़रूर
हाथ जोड़कर कहा,
आपने क्यों तकलीफ की, बुलवा लेते हुज़ूर
वो अन्दर आकर बैठे,
फुफकार के साथ फन पटका
किसी अनहोनी की आशंका से, हमने थूक गटका
वो बोले विद्वान होकर भी तुम कमाल करते हो
अजीब अजीब से बेतुके सवाल करते हो
भई आज नागपंचमी है, हम आज ही निकलते हैं
वरना साल भर तो तुम्हारी आस्तीन में पलते हैं
तुम बड़े जल्दी भूल जाते हो
इसलिए बार बार डसे जाते हो
आज व्रत की मजबूरी में दूध पी रहे हैं
वैसे तो तुम्हारा खून पीकर ही जी रहे हैं
खैर छोडो ये सब फिजूल की बातें हैं
तुम दूध पिलाओ फिर हम जाते हैं
हमने जैसे तैसे थोड़ी हिम्मत बटोरी
काँपते हाथ से उठाई खाली कटोरी
हमने कहा हुज़ूर आप अन्नदाता हैं
और हम मामूली से मतदाता हैं
पांच साल में एक बार वोट देते हैं
और आप साल में पांच बार चोट देते हैं
आपने पाल रखी है एक डायन महंगाई
वो चट कर गई हमारे घर की दूध मलाई
हमारे बच्चे ही अब दूध नहीं पी पाते हैं
आजकल हम साँपों को दूध नहीं पिलाते हैं
हमने सोच लिया है, अब नहीं चलेगी लुच्चाई
हम पियें छाँछ और तुम खाओ मलाई?
हमने विश्वास को पाला, श्रद्धा को गले में लटकाया है
मगर तुम साँप हो, बहुत देर से समझ में आया है
तुम ही हो जिसने नफरत का ज़हर फैलाया है
तुम ही तो हो जिसने मुल्क को बँटवाया है
आज आँख में आँख डालकर बोलने का वक़्त आया है
जिसका फन कुचलना था, हमने सर पर बिठाया है
दोस्तो, ये थे हमारे नेता विषधर भाई
चुनाव का मौसम है सो हमारी याद आयी
अपने शाकाहार की दे रहे थे दुहाई
हमारे वोट को समझ रहे थे मलाई
ये खेल बरसों बाद हम आज समझ पाये हैं
विषधरों की बीन पर अब तक हम ही नाचते आये हैं
© - प्रशांत सेठ
