हे डरे हुए लोगों के 49 प्रतिनिधियो
तुम्हारा डर लाज़िमी है
क्योंकि
तुम्हारा धर्म खतरे में है
तुम्ही से
तुम्ही से
धर्म मरता नहीं है
धार्मिकों के मरने से
ईसाईयत नहीं मरी यीशु के साथ
बुद्धत्व नहीं गया बुध्द के साथ
सनातन धर्म मिटा नहीं
राम-कृष्ण के साथ
धर्म मरता है
जब तुम नहीं डरते
मंदिर के प्रसाद में
ज़हर की साज़िश रचते कुछ लोगों से
स्त्रियों को बाँझपन बाँटते श्रीलंकाई डॉक्टर से
मदरसे में पकड़े जाते हथियारों से
महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करते
कौम के नेताओं से
कश्मीर के पत्थरबाजों से, हैवानों से
ट्विन टॉवर को मिटाते लादेनों से
मुम्बई को दहलाती साज़िशों से
ध्रुव त्यागियों के हत्यारों से
बुरहान वानियों से, दाऊद इब्राहिमों से
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जब तुम नहीं डरते
मध्य पूर्व से आयातित क्रूरता से
धार्मिक उच्छृंखलता से
धर्म के तालिबानी संस्करण से
धर्म मरता है
जब तुम भूल जाते हो
कलाम साहब को, अशफाकुल्लाह को
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अब्दुल हमीद को भूलकर
जब तुम्हें दिखता है नायक
तबरेज़ आलमों में
तबरेज़ आलमों में
मुझे डर लगता है
जब कोई मदान्ध हत्यारा लेता है
"राम" का नाम
जब कोई कुंठित भगवाधारी देता है
धर्म की परिभाषा
मुझे डर लगता है तब
धार्मिकों की खामोशी से
क्योंकि तब तब
मैं देखता हूँ अपने धर्म को मरते हुए
तुम डरो ज़रूर डरो
तुम्हारा डर ही
विश्व शांति की नई उदघोषणा है
क्योंकि
तुम तब नहीं डरते
जब तुम्हारा धर्म मरता है
अजमल कसाव के हाथों
या फिर हाफ़िज़ सईद की तक़रीरों से
© - प्रशांत सेठ


