मैंने पढ़ा है
कुछ पदार्थ करते हैं मिलकर
रासायनिक क्रिया
जब अम्ल और क्षार मिलते हैं
तो रह जाता है शेष
नमक और पानी
उन्होंने भी पढ़ा होगा
तभी तो मिलने नहीं देते
सनातन सत्य से
मुसलसल ईमान को
कहीं जाग ना जाए
तुम्हारे खून में नमक
तुम्हारी आँखों में पानी
और धुली हुई आँखों से तुम
पढ़ ना लो फिर से
धर्म को
मैंने सुना है
कुछ पदार्थ होते हैं ज्वलनशील
ज़रा सी हवा में
पकड़ लेते हैं आग
सियासत की हवा में
पाखण्ड और अज्ञान भी
पकड़ लेते हैं
कट्टरता की आग
ये डाल देती है समझ पर
रंगीन धुएं का आवरण
ये करती है सत्य के झूठे अनुवाद
और सोख लेती है
धर्म ग्रंथों से उनके वास्तविक अर्थ
मैंने पढ़ा है
कुछ शाही पदार्थ क्रिया नहीं करते
किसी भी तत्त्व के साथ
जैसे कि धर्म और ज्ञान
इनके सामने हार जाती है
सियासत की हर साज़िश
मगर
मैं जानता हूँ
कुछ पदार्थ होते हैं
प्राणों से भी अधिक बहुमूल्य
इनमें से एक है
अपनी संस्कृति भी
© - प्रशांत सेठ

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