शुभकामनाओं का आदान प्रदान तो हर वर्ष होता है, मगर दुआयें सबको फलीभूत क्यों नहीं होतीं?
केवल शुभकामनाओं से आपका समय बदलता हो, तो हम भी दिए देते हैं। परंतु सच तो ये है कि केवल शुभकामनाओं से, ना मेरा कुछ बदलेगा, ना आपका।
हमारी शुभकामनाओं को फलीभूत होने के लिए आवश्यकता है, आपके निश्छल प्रयास की। क्योंकि केवल तिथि बदलने से परिस्थिति नहीं बदलेगी। इसलिये आज नव वर्ष पर हम भी आपको शुभकामनायें अवश्य देंगे, मगर सशर्त ...
अगर तुम्हारी झोली में
कुछ सपने हैं
और उन सपनो में शामिल
तुम्हारे अपने हैं
नित नई चुनौतियों से
मिलने का साहस है
और लक्ष्य को समर्पित
निश्छल प्रयास है
तो मैं नहीं कहता
नया साल मुबारक हो
तुम्हारा हर साल
मुबारक है मुबारक है मुबारक है
द्वेष रहित ह्रदय में
क्षमा है, आभार भी
जीवन के हर रंग से
तुम्हें है प्यार भी
विष पीकर भी तुम
बाँट सके हो अमृत
और मधुरता ही शेष है
आज मन में स्मृत
तो मैं नहीं कहता
नया साल मुबारक हो
तुम्हारा गया साल भी
मुबारक है मुबारक है मुबारक है
अगर तुम्हारी झोली में
खट्टी मीठी यादें हैं
और इन यादों में
अनुभव की सौगातें हैं
अगर तुमने बोये हैं
बीज खुशियों के
तो हमारी भी
दुआओं की बरसातें हैं
मैं नहीं कहता
नया साल मुबारक हो
तुम्हारा हर दिन
मुबारक है मुबारक है मुबारक है
© - प्रशांत सेठ
सशर्त शुभकामनायें http://prasantseth.blogspot.com/2016/01/blog-post.html