Sunday, June 21, 2020

मैं अज्ञानी अधजल गागर - गुरु प्रार्थना

मैं अज्ञानी अधजल गागर
गुरुवर तुम हो ज्ञान का सागर
धन्य जीवन है तुमको पाकर
श्री चरणों की शरण में आकर

ज्ञान दीप हृदय में जलाकर
दृष्टि दो अंधकार मिटाकर
तुम से आलोकित है ये जीवन
सूर्य से जैसे रहता सुधाकर

घट श्वासों का रीत रहा है
राह दुर्गम है थाम लो आकर
तृष्णा में संसार की डूबे
मेरे मन को उबारो प्रभाकर

ध्येय तुम हो और मार्ग भी तुम
तुम ही नैया हो तुम ही सागर
जो डूबा वो पार हुआ है
स्नेह सिंधु में डुबकी लगाकर

© - प्रशांत सेठ

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