Friday, July 31, 2020

काव्यमदूत - आह-कवि जालीदासों को समर्पित

"यमपुरी में नए यमदूतों की आवश्यकता
केवल कवियों को ही प्राथमिकता"

अखबार में ये विज्ञापन पढ़कर मैं चौंका
ये सत्य है या केवल आँखों का धोखा?
मैंने आंखों को मला, फिर से पढ़ा, यही सच था
आगे जो लिखा था वो और भी "टू मच" था

मृत्युलोक से यमलोक की 86000 योजन की दूरी है
और लंबी यात्रा में मनोरंजन भी जरूरी है
छोड़ो सारे किंतु, परंतु, अगर, मगर, पर
बेरोजगारी के दौर में नहीं मिलेगा ये अवसर
इसलिए आज ही ऑनलाइन अप्लाई कीजिये
योग्यता कोई नहीं, बस कवि होने का प्रमाण दीजिये

मैंने श्रीमती जी को आवाज़ लगाई
भाग्यवान, क्या मैं भी आएं बाएं अल्लम गल्लम बकता हूँ?
बताओ क्या मैं भी आधुनिक काल का कवि लगता हूँ?
उनकी सहमति पाकर मेरा कॉन्फिडेंस जागा
और मैं मनीष तिवारी जी के घर की ओर भागा
अपनी भड़ास का ये जो नित्य वमन करते हो
सुना है तुम भी ऑनलाइन कविता पढ़ते हो
एक से भले दो होते हैं, ये बात बुजुर्ग बताते हैं
चलो हम दोनों मिलकर ये दायित्व उठाते हैं

अगले ही दिन हम इंटरव्यू की लाइन में खड़े थे
देखा तो वहां बड़े बड़े दिग्गज पहले से पड़े थे

चित्रगुप्त बता रहे थे कि
कोरोना के कारण यमपुरी में फुल हैं समस्त सीटें
समझ में नहीं आ रहा अब पापियों का कहाँ पीटें
हम लोगों ने नरक की एजुकेशन पॉलिसी में चेंज किया है
और ये आईडिया हमने भारत के शिक्षा मंत्री से एक्सचेंज किया है
अब नरकगामियों की यात्रा को यंत्रणा बनाना है
इसलिए तुम कवियों को यमदूत की ड्यूटी निभाना है

हमने कहा हुजूर आप चिंता मत कीजिये
एक बार सेवा का यह अवसर तो दीजिये
यम-योग्य कवि लेखक तो हिंदुस्तान में सर्वत्र हैं
लेकिन हमारे पास कई संस्थाओं के सम्मान पत्र हैं
मंचों पर निकाली हमेशा भड़ास और खीज है
जिंदों को सताया है, ये मृतक क्या चीज है

हमारी कविताएं सुन सुनके आत्माएं घायल हैं
यहाँ सभी चित्रगुप्त के मैनेजमेंट के कायल हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है, नए यमदूत बहुत होनहार हैं 
गुप्ताजी की हो रही जय जयकार है 
सारी यमपुरी में हमारी भूरी भूरी प्रशंसा है
हमारी नियुक्ति में यमराज की अनुशंसा है 

लोग कह रहे हैं
आपने साहित्यकारों को नहीं, सही-हत्याकारों को चुना है
बाकी सब तो थोथा चना बाजे घना हैं
इनके हत्थे जो भी चढ़ेगा, स्वर्ग का पात्र हो जाएगा
अपने पापों के लिए वो हज़ार बार पछतायेगा
इस जनम की छोड़िए, अगले जन्म की एडवांस सजा पायेगा
क्योंकि यहां तक आते आते वो कई बार मर जायेगा

© - प्रशांत सेठ


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