हालाँकि हिंसा गलत है मगर केजरीवाल पहले ऐसे नेता हैं जो जनता की पहुँच के इतने अंदर हैं। और कुछ हो न हो आम लोगों का साहस तो जागा है। दुआ कीजिए की जनता इतनी समझदार और शिक्षित भी हो जाये कि अपने आक्रोश को शब्दों से और वोटों से व्यक्त करना सीख जाये।
बाकी छोड़ो इस थपड़ियाई की कुछ तो कीमत उस गरीब आदमी को मिली ही होगी। चलो किसी गरीब का भला यूँ ही सही।
अवाम-ए-हिंद इतनी औकात तक पहुँचे
नेताओं के गिरेबाँ तक हाथ तो पहुँचे
मेरे गालों पर तेरे हाथ के निशाँ सही
मुझ तक मेरे दोस्त, तेरे जज़बात तो पहुँचे
- प्रशांत सेठ
No comments:
Post a Comment