मन में सामाजिक आंदोलन रहे और राजनीति को शस्त्र की तरह प्रयोग करें। ऐसे ही साथियों से दिल मिलता है। उनको बहुत दूर रखता हूँ जिनके मन में राजनीति है और आंदोलन को शस्त्र बनाना चाहते हैं। स्वयं को स्थापित करने का उद्देश्य छोड़िये और मूल्यों को स्थापित करने की बात सोचिये। छोटी सी बात है मगर फर्क बड़ा पड़ जाता है।
एक मुक्तक...
तेरे अंदर जिस दिन सारा खुदगर्ज़ मौसम बदलेगा,
झूठ फरेब नफरत ज़ुल्म, ये सारा आलम बदलेगा !
अंदर बाहर का तुम अपने, एक ही मौसम कर चलो,
खुद का मन बदलेगा तो गुलशन गुलशन बदलेगा !!
© - प्रशांत सेठ
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