Friday, April 25, 2014

दोस्ती

दोस्ती एक बेशकीमती एहसास है। जो पास है उसे खोना नहीं और कोई हाथ बढ़ाये तो छोड़ना नहीं।

मेरी दोस्ती के तलबगार, तुम हो ये मैंने माना
कहो तो खुलकर आज, अपने भी एहसास रख दूं !
तकदीर में बची हुई, वो हर सांस रख दूं,
आ तेरे हाथों में, जो कुछ है पास रख दूं !!

©-प्रशांत सेठ

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