सम्पूर्ण मानवता को सनातन संस्कृति की शुभकामनाएं देता पर्व 🙏🏼
तुम्हारे इस राशि से उस राशि में
प्रवेश का अर्थ
मगर, हे सूर्यदेव!
मैं देख रहा हूँ
माँ नर्मदा की गोद में
सर्द मौसम को पिघलते हुए
काश पिघल जाए इसी के साथ
संबंधों के पहाड़ पर पसरी
बर्फ सी सफेद चादरें
अहंकार की
इच्छाओं की पतंगे
खूब छुएँ आसमान
मगर बंधी रहें
सिद्धांतों की डोर से
ज्ञान का उदित सूर्य
मुक्त करे अस्तित्व को
माया के संक्रमण से
हम करें दान
अज्ञान से संचित सारे संग्रह
मुक्त हो जाए ये बूँद
पृथकता के संकल्प से
कर सके समर्पण
उस शाश्वत सागर की
अनंत गहराई में
छूट जाएं आज
शरशैया पर लेटे जीवन की
हठीली भीष्म प्रतिज्ञाएं
और मानवता हो चले मुक्त
अधर्म के पाश से
© - प्रशांत सेठ
Wow very nice.. .
ReplyDeleteThanks
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