Wednesday, March 25, 2020

कोरोना और सनातन वैदिक परम्पराएं - प्रशासनिक लक्ष्मण रेखा - 2

कोरोना रूपी आपदा से निपटने के लिए सम्पूर्ण भारत को 21 दिन के लिये lockdown कर दिया गया है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आपके परिवार का एक सदस्य होने के अधिकार से, मैं सबके घर के बाहर एक लक्ष्मण रेखा खींच रहा हूँ। अतः आज का विषय थोड़े हास परिहास के साथ ये है।

प्रशासनिक लक्ष्मण रेखा - 2

आगामी 21 दिन तक घर की दहरी के पार एक लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। यह "लक्ष्मण रेखा" प्रशासनिक पाबंदी के लिए एक प्रतीकात्मक शब्द है। त्रेता युग में श्री राम स्वर्णमृग रूपी रहस्य की खोज में पंचवटी का प्रशासन लक्ष्मण जी को सौंप कर गए थे। तभी "लक्ष्मण बचाओ!" की आवाज़ सुनकर आकस्मिक आपदा से निपटने के लिए सीता जी ने लक्ष्मण को आदेश दिया। यहाँ गौर करने लायक एक बात और है कि सीता जी के इस आदेश ने श्रीराम जी के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें लक्ष्मण जी को कुटी के बाहर पहरा देने का निर्देश था। तब विवश होकर लक्ष्मण जी ने प्रशासनिक अधिकार का प्रयोग करते हुए उन्हें कुटी से बाहर ना निकलने का निवेदन किया। संभवतः कुटी के बाहर नकारात्मक शक्तियों के षड़यंत्र का आभास होने पर ऐसा निर्णय लिया गया होगा।

सृष्टि की वास्तविक और स्थायी सत्ता तो ईश्वर के अधीन है, इसलिए समय समय पर बनने वाली सरकारों के मुखिया को हम लक्ष्मण मान सकते हैं। विशेषकर उन्हें, जो घर परिवार को त्याग कर जनता जनार्दन की सेवा में रत हैं। आज भी जब देश भर से आवाजें आनी शुरू हुईं "लक्ष्मण बचाओ!!"; तो जनता रूपी सीता ने अपने लक्ष्मण को कोरोना रूपी अदृश्य संकट से निपटने का आदेश दिया। तब अपने लक्ष्मण जी ने, सीता रूपी पवित्र और भोली जनता को लक्ष्मण रेखा ना लांघने का निर्देश दिया। क्योंकि बाहर कोरोना रूपी रावण आपका हरण करके लंका की अशोक वाटिका रूपी आइसोलेशन वार्ड में ले जाने को तत्पर बैठा है। जो लोग कोरोना से नहीं डरते, उन्हें भी फिलहाल पुलिस को रावण और जेल को अशोक वाटिका समझ कर घर बैठ जाना चाहिए। पुष्पक विमान की यात्रा दुःखदायी सिद्ध हो सकती है।

सार ये है कि किसी भी प्रकार के स्वर्ण मृग, यानी व्यवसाय अथवा धर्म के लोभ में भी घर से बाहर ना निकलें, क्योंकि कोरोना के द्वारा हरण होने की दशा में डॉक्टर रूपी जटायु, अपने प्राणों को संकट में डाल कर भी आपको बचाने में असमर्थ हो सकते हैं।

© - प्रशांत सेठ

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