अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं
"प्रियतमा"
अपनी उड़ान से
तुमने हरा दिया रेसिंग ट्रैक को
अपनी रफ्तार से
तुमने झुका दिया हिमशिखरों को
अपने हौसले से
उधर आज भी
सुदूर गाँव में कहीं,
किसी बैलगाड़ी के पीछे चलते चलते
युग बीते, मगर
तुम पहुँच नहीं पाईं
बैलों की लगाम तक
यकीन मानो
निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक
तुम्हारा यह सफर
पुरुषत्व की पराजय नहीं है
बल्कि, खरीद सकते हैं हम-तुम मिलकर
बैलों की एक और जोड़ी
© - प्रशांत सेठ
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