फूटपाथ पर एक भूख से बेहाल मासूम को बहलाते हुए जब उस माँ को देखा तो अन्दर तक हिल गया। एक ख्याल उभरा और फिर एक क़ता हो गया...
मासूम भूख को बहलाती, बेबस माँ की आहों में !!
सच से मचलते बचपन को, फिर एक झूठ ने सुला दिया !
मैं सोचता रहा और वो बढ़ गयी, लिये जिंदगी बाहों में !!
खाली बर्तन में चमचा हिलाती है
खाने के पहले माँ लोरी सुनाती है
तब मैं भी सो जाता हूँ,
वर्ना भूखे पेट किसे नींद आती है