समय की लहरें ले जायेंगी
अक्षर अक्षर जो है तट पर
निराशा को रेत पर लिखना
आशा लिखना पत्थर पर
जीवन है अभी शेष बहुत
चल पथिक साहस रथ पर
सुगमता ढूँढ़ रहा जग सारा
तू चल केवल दुर्गम पथ पर
चल पथिक साहस रथ पर
सुगमता ढूँढ़ रहा जग सारा
तू चल केवल दुर्गम पथ पर
ढूँढ़ कहीं वो निश्चित होगा
कोई भगीरथ तेरे अन्दर
उतर आयेगी धरती पर गंगा
संकल्प दृढ रख, स्वप्न सच कर
कोई भगीरथ तेरे अन्दर
उतर आयेगी धरती पर गंगा
संकल्प दृढ रख, स्वप्न सच कर
चुनौतियों से मत घबराना
प्रलोभनों से चलना बचकर
अवरोधों से निखर आयेगी
प्रतिभा जो सोती है छुपकर
प्रलोभनों से चलना बचकर
अवरोधों से निखर आयेगी
प्रतिभा जो सोती है छुपकर
क्षणिक सफलता बहकाये तो
कह देना तुम उससे हंसकर
संकल्प अभी कहाँ पूर्ण हुआ है
समर शेष है, उत्सव मत कर
कह देना तुम उससे हंसकर
संकल्प अभी कहाँ पूर्ण हुआ है
समर शेष है, उत्सव मत कर
सच पूछो तो यही लक्ष्य है
सतत चलना मिथ्या से हटकर
बोध होने को क्षण ही बहुत है
सत्य स्वयं आता है चलकर
सतत चलना मिथ्या से हटकर
बोध होने को क्षण ही बहुत है
सत्य स्वयं आता है चलकर
© - प्रशांत सेठ
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