दिल भी है अपना, दर-ओ-दीवार है यहाँ
ये वो शहर है सब अपने यार हैं जहाँ
मेरे बचपन की खुश्बू, मेरे माज़ी के किस्से
मेरे आज भी कई तलबगार हैं यहाँ
-प्रशांत सेठ
ये वो शहर है सब अपने यार हैं जहाँ
मेरे बचपन की खुश्बू, मेरे माज़ी के किस्से
मेरे आज भी कई तलबगार हैं यहाँ
-प्रशांत सेठ
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