स्वाभिमान नहीं स्वार्थ जगाया
कैसा तुमने पार्थ जगाया
इस सदी के धर्मयुद्ध में कृष्ण
धर्म पराजित ही कहलाया
मानवता की स्थापना के उस
लक्ष्य से दूर भटक ये आया
जूझ रहा है चक्रव्यूह से
जो था इसने स्वयं रचाया
भ्रष्टाचार के हस्तिनापुर ने
फिर उल्लास उत्सव मनाया
शस्त्र छोड़ खड़ा कुरुक्षेत्र में
अर्जुन पुन: भ्रमित घबराया
राजनीति की चौसर पर क्या
लोभ संवरण कर नहीं पाया?
या फिर उसके रथ से कृष्ण
तू ही स्वयं उतर है आया?
हम सैनिक ये प्रश्न लिये हैं
राष्ट्रधर्म नहीं किसने निभाया?
बलिदानो को तत्पर थे फिर
अहं क्यों और कैसे टकराया?
© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ
कैसा तुमने पार्थ जगाया
इस सदी के धर्मयुद्ध में कृष्ण
धर्म पराजित ही कहलाया
मानवता की स्थापना के उस
लक्ष्य से दूर भटक ये आया
जूझ रहा है चक्रव्यूह से
जो था इसने स्वयं रचाया
भ्रष्टाचार के हस्तिनापुर ने
फिर उल्लास उत्सव मनाया
शस्त्र छोड़ खड़ा कुरुक्षेत्र में
अर्जुन पुन: भ्रमित घबराया
राजनीति की चौसर पर क्या
लोभ संवरण कर नहीं पाया?
या फिर उसके रथ से कृष्ण
तू ही स्वयं उतर है आया?
हम सैनिक ये प्रश्न लिये हैं
राष्ट्रधर्म नहीं किसने निभाया?
बलिदानो को तत्पर थे फिर
अहं क्यों और कैसे टकराया?
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