Saturday, March 22, 2014

धर्मयुद्ध

स्वाभिमान नहीं स्वार्थ जगाया
कैसा तुमने पार्थ जगाया
इस सदी के धर्मयुद्ध में कृष्ण
धर्म पराजित ही कहलाया

मानवता की स्थापना के उस
लक्ष्य से दूर भटक ये आया
जूझ रहा है चक्रव्यूह से
जो था इसने स्वयं रचाया

भ्रष्टाचार के हस्तिनापुर ने
फिर उल्लास उत्सव मनाया
शस्त्र छोड़ खड़ा कुरुक्षेत्र में
अर्जुन पुन: भ्रमित घबराया

राजनीति की चौसर पर क्या
लोभ संवरण कर नहीं पाया?
या फिर उसके रथ से कृष्ण
तू ही स्वयं उतर है आया?

हम सैनिक ये प्रश्न लिये हैं
राष्ट्रधर्म नहीं किसने निभाया?
बलिदानो को तत्पर थे फिर
अहं क्यों और कैसे टकराया?

© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ


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