Tuesday, March 25, 2014

रोते हुये को हंसाया जाये

बनके आंसू जिया इस तरह जाये
चलो किसी की आँख से यूँ गिरा जाये
किसी के हिस्से का रो लें हम कभी
हमारे हिस्से का कोई मुस्कुरा जाये

© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ


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