मनुष्य का स्वभाव है अहं। ये वो मानव प्रवृति है जो सम्मान पाने या पहचान बनाने की आकांक्षा को जन्म देती है। आत्मविश्वास के अभाव में स्वयं की मौलिकता को न तलाश कर, कई लोग दूसरों की रचनाओं को अपना बताकर पढ़ने का क्षणिक सुख पा लेते हैं। परन्तु खो देते हैं सृजन के असीम आनंद को। ये पंक्तियाँ समर्पित हैं ऐसे ही मित्रों को
किसी कोख से निकला, किसी सीने से बच्चा लगा
शेर मेरा था लेकिन, तेरे मुँह से भी अच्छा लगा
- प्रशांत सेठ
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