वो ज़मीं में सो गया हर सांस लुटा के
गो जी सकें अमन से हम अपना सर उठा के
इंतज़ार में होगा कोई अपनी मांग सजा के
चल दिया यूँ बेवफा उसकी दुनिया मिटा के
जितना था खूँ जिस्म में सारा बहा के
चंद अश्क कमाये नसीब ने बेदर्द जहां के
बेवा के उसकी हाथ कुछ मुआवजा थमा के
सो जायेंगे हम भी फिर से ये दस्तूर निभा के
ये तो चला लम्बे सफ़र पर सब धूल झडा के
था फ़र्ज़ जिंदगी से बड़ा इतनी बात बता के
सोचो क्या पाया हमने ये दिलदार गंवा के
हम भी वही तुम भी वही बस शेर जुबां के
© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ
गो जी सकें अमन से हम अपना सर उठा के
इंतज़ार में होगा कोई अपनी मांग सजा के
चल दिया यूँ बेवफा उसकी दुनिया मिटा के
जितना था खूँ जिस्म में सारा बहा के
चंद अश्क कमाये नसीब ने बेदर्द जहां के
बेवा के उसकी हाथ कुछ मुआवजा थमा के
सो जायेंगे हम भी फिर से ये दस्तूर निभा के
ये तो चला लम्बे सफ़र पर सब धूल झडा के
था फ़र्ज़ जिंदगी से बड़ा इतनी बात बता के
सोचो क्या पाया हमने ये दिलदार गंवा के
हम भी वही तुम भी वही बस शेर जुबां के
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