मैंने पढ़ा था कभी,
प्रकाश की किरण
करती है गमन सीधी रेखा में
और बदल लेती है कोण
एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक जाते जाते,
घनत्व में भेद के प्रभाव से
बहुत तो नहीं,
किंतु समझ ली थी बचपन में ही
यह छोटी सी बात
कि
किसी वस्तु को जानने के लिए
देखना पड़ता है,
उसे भिन्न कोणों से
समग्र दृष्टि से
आज भी
विषय वस्तु पर पड़ने वाले
अलग अलग दृष्टिकोण को
देख लेता हूँ मैं,
चैनल बदल बदल कर
मुझे पता है
मसले क्यों बदल लेते हैं कोण
सोशल मीडिया पर
एक प्रोफाइल से दूसरी प्रोफाइल तक
मैं जानता हूँ
तुम्हारे ज्ञान का आधार है
तुम्हारी बुद्धि में "ग्रे मैटर" का घनत्व
जितना अधिक घनत्व
उतना ट्विस्टेड सत्य
तभी तो बहुत से बुद्धि-जीभी
ज़िंदगी जी नहीं पाते
चल देते हैं उम्र गुज़ारकर
अनुभव के नाम पर,
दृष्टिकोण में उलझकर
और अक्सर,
पीढ़ियों को उलझाकर
किसी नए "वाद" में
© - प्रशांत सेठ




