तुमने देखा होगा
दुनिया लिखती है
तुम्हारे मन के ब्लैकबोर्ड पर
अपना अपना गणित
समय की सफेद चॉक
छोड़ जाती है बहुत से निशान
अनुभव के
और धीरे धीरे यही निशान
बन जाते हैं "जीवन दर्शन"
बस इतना करना
अगली कक्षा में जाने के पहले
मिटाते जाना हर एक निशान
प्रेम के डस्टर से
शून्य से शून्य तक
सृष्टि का विस्तार और सिमटना
निर्भर है तुम्हारी कला पर
क्या सौंप सकोगे वापस?
मन का ब्लैकबोर्ड
ज्यों का त्यों, कोरा ही
जीवन के स्कूल में
बुद्धत्व के पाठ से उपजा
एक प्रश्न
© - प्रशांत सेठ
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