Sunday, March 6, 2016

यदा यदा ही धर्मस्य .....

हमने तो सुना था की जब जब धर्म की हानि होगी तब तब कन्हैया का अवतार होगा। मगर हे केशव, ये कैसा कन्हैया है? भारतीय राजनीति में इसका अवतरण भी जेल जाकर ही हुआ है। और अबकी बार तो प्रायोजक भी साथ हैं और मीडिया भी। अभी बाल अवस्था में है, इसलिये थोडा चंचल है। कल जब बड़ा होगा (क्षमा कीजियेगा "बड़ा बना दिया जायेगा") तो महाभारत रचेगा। इसने भी सत्ताधीशों को ही चुनौती दी है। फल (जेल) की चिंता किये बगैर कर्म (राजद्रोह) कर रहा है। इसके रथ पर भी पंच दलीय पांडव सवार होकर युद्ध कर रहे हैं। कल ये भी सत्तासीन कौरवों से, विस्थापित आतंकवादियों के लिए पांच गाँव (कश्मीर) मांगेगा (विस्थापित इसलिये क्योंकि इन आतंकवादियों का जन्मदाता देश ही इन्हें अपना मानने से इनकार कर देता है)। यही एक घंटे का उदबोधन गीता कहलायेगा और JNU कहलायेगा कुरुक्षेत्र। जीत हार का तो पता नहीं, लेकिन एक बात तय है कि इस तथाकथित राष्ट्रधर्म के युद्ध में चीरहरण होगा तो सिर्फ भारत माँ का। ये कैसी लीला है प्रभु?

सुनो वत्स!
इतिहास गवाह है की मैंने कभी पुरानी स्क्रिप्ट नहीं दोहराई। हर अवतार में नयी स्क्रिप्ट लेकर आता हूँ। क्योंकि मुझे पहले ही वह मंत्र पता है "नक्कालों से सावधान"। ये वैसा ही नकली कन्हैया है, जैसा नकली तुम्हारा (राष्ट्र) धर्म है। इसलिये मेरी नई घोषणा सुनो।

"जब जब धर्म के नकली स्वरुप को आचरण में धारण करते रहोगे, तब तब नकली अवतार होते रहेंगे। जब जब निजी मान्यताओं को धर्म बताकर दूसरों पर थोपोगे तब तब (राष्ट्र) धर्म की हानि होती रहेगी। ऐसे किसी भी धर्म को राष्ट्र और मानवता से ऊपर रखोगे तो ऐसे ही कन्हैया (कुमार) और (आशा) राम उत्पन्न होते रहेंगे।"

अत: इस कलयुग में असली अवतार की प्रतीक्षा करो और तब तक नकली का भजन जपो। और हाँ, अपने भजन में उन तत्वों का भी गुणगान करना मत भूलना जिन्होंने ऐसे तमाम कलयुगी कन्हैयाओं के अवतरण में मुख्य भूमिका निभाई है।

जो आज्ञा प्रभु!

प्रभु स्वप्न में आज्ञा देकर अंतर्ध्यान हो गए और हमने इन कलयुगी कन्हैयाओं की शान में एक भजन टाइप का रच डाला। आइये जाप करें...

हाथी घोड़ा पालकी
जय कन्हैयालाल की

इशरत के सवाल की
आरक्षण के भूचाल की
JNU के बवाल की
जय बोलो कन्हैया लाल की

कोरे बज रहे गाल की
टेढ़ी मेढ़ी चाल की
दिल्ली के नटवरलाल की
जय बोलो ....वाल की

धोती के रुमाल की
खाल निकाले बाल की
नित नये नये धमाल की
जय बोलो मीडियाई चौपाल की

कर्ज से जुटाये माल की
सेंसेक्स के उछाल की
माल्या के कमाल की
जय बोलो कॉर्पोरेट कंगाल की

सेकुलरिज्म के जाल की
धर्म के इस्तेमाल की
जी के इस जंजाल की
जय बोलो लोकतंत्र के हाल की

© - प्रशांत सेठ

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