Friday, May 1, 2015

श्रमवीर

मज़दूर दिवस पर दुनिया के तमाम मज़दूरों को मज़दूर होने और रहने की बधाई। तुम्हारा मर्ज़ दूर होगा या नहीं, ये तो मैं नहीं बता सकता; लेकिन इतना ज़रूर बता सकता हूँ कि दुनिया के हर ख्वाब की नींव में तुम्हारा पसीना होगा। तुम्हारे ख्वाबों की कब्र पर बड़े बड़े ताजमहल खड़े होंगे। तुम्हारे कांधों पर चढ़कर ही दुनिया चाँद पर पहुंचती रहेगी ...

तुम्हारे कांधों पर टिका जहान है
इस संसार का यही गूढ़ विज्ञान है
तेरे अरमानों की लाश पर श्रमवीर
हमारे सपनो का सुन्दर मकान है

एक व्यंग रचना...

कोई इतना क्यों मजबूर होता है
पापा, एक आदमी क्यों मज़दूर होता है
आज फिर मैं एक कठोर सच से जूझा
जब स्कूल से आकर मेरी बेटी ने पूछा

ये शख्स पत्थरों पर क्यों सोता है
इसका बच्चा भूख से क्यों रोता है
क्यों ये हर सुख सुविधा से दूर होता है
बताओ ना पापा इसका क्या कुसूर होता है

बच्चों की अलग दुनिया, अलग भाषा होती है
उसमें संवेदना, प्रेम, विश्वास और आशा होती है
ये जो बाहर दिखते हैं, वही अंदर से होते हैं
हमारी सोने की लंका में ये बन्दर से होते हैं

मैं घबराया, ऐसी भावनायें इस युग में महापाप हैं
लोग हमें धिक्कारेंगे, आप किस तरह के बाप हैं
इन फ़िज़ूल बातों को इसके मन से मिटाना होगा
अभी ये बन्दर है इसे इंसान बनाना होगा

मैंने कहा, कौन कहता है ये मजबूर होता है
सरकारी फाइलों में ये बड़ा मशहूर होता है
इसके लिए देेश में योजनायें हैं बहुत सारी
मगर इसको है नहीं सुधरने की बीमारी

इन योजनाओं में अफसर मंत्री सब पनप जाते हैं
गली मोहल्ले के छुटभैये नेता भी खप जाते हैं
एक यही है जो जस का तस रहता है
खट्टे अंगूरों को ताकता बस रहता है

इस प्रजाति में एक बात ख़ास होती है
इसे ना भूख लगती है, ना प्यास होती है
इसके जिस्म में खून नहीं, पानी बदस्तूर होता है
जिस दिन बहता नहीं पसीना, आँखों में ज़रूर होता है

आधी ज़िन्दगी ये व्रत रखता है
इसको अपनी भूख पर गुरूर होता है
फुटपाथों पर ये चैन से सोता है
बिस्तरों का इसको कहाँ शऊर होता है

इसको अस्पतालों की ज़रूरत नहीं है, ये बीमार नहीं होता
ये पढ़ लिख जाता तो आज ताजमहल और क़ुतुब मीनार नहीं होता
इन बातों को हमारा समाज अच्छी तरह समझता है
इसलिये इन सुविधाओं से इसको वंचित रखता है

इसकी आमदनी भी बड़ी भारी होती है
तभी तो इसकी बस्ती में कलारी होती है
भौतिक सपनों से दूर ये त्यागी महान होता है
संसार की नश्वरता का इसको पूर्ण ज्ञान होता है

आज मई दिवस है, नेताजी ने यूँ ही भाषण दिया होगा
स्कूल वालों ने गरीबों को मुफ़्त में राशन दिया होगा
तुम फ़िक्र मत करो, आज के दिन का ये राजनैतिक दस्तूर है
ये तो कल भी मज़दूर था बेटी, ये आज भी मज़दूर है

© - प्रशांत सेठ

1 comment: