#salmanverdict
वो कहते हैं की फुटपाथ पर सोना है तो ज़िन्दगी की उम्मीद मत रखिये। क्योंकि किसी रईस की बहका हुआ अहंकार आपको कभी भी रौंद सकता है।
गरीब होना अपने आप में एक जुर्म है। उस पर से किसी रईस के अहंकार से टकराना, यानि महापाप। इस जुर्म की सजा तो मिलनी ही थी। गरीब को 13 साल पहले ही मिल गई।
अभिजीत का कमेंट और कुछ नहीं बस दिल और दिमाग के बीच की दूरी है। और दिल के हिसाब से इस दिमागी दुनिया में तो रहा नहीं जा सकता। इसलिए Being Human नहीं अब Being Abhijeet होने का दौर है। एक ग़ज़ल इसी बात पे.....
आब-ए-चश्म की मानिंद, निकल चलते हैं
सिर्फ़ एहसास लिये, अये दिल, चल चलते हैं
पर क़तर देगी ओ पैरों पे ना टिकने देगी
उल्टी दुनिया है, चलो सर के ही बल, चलते हैं
हैं ये खोटे सही, पर जेब तो खनकाते हैं
नहीं बाज़ार में, सिक्के अब, असल चलते हैं
धुंध है याकि, तेज़ रोशनी है, दौलत की
अंधे जज़्बात हैं, तो हम भी,सम्हल चलते हैं
दिल को छोड़े कि हम, अक्ल का दामन थामें
साथ इस दौर के, चुपचाप, बदल चलते हैं
फिर कोई 'सेठ' ना फ़ुटपाथ को ज़ख़्मी कर दे
है अमीरों का शहर, इसमें शगल चलते हैं।
© - प्रशांत सेठ
आब-ए-चश्म = आंसू, शगल = चोंचले

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