Friday, February 21, 2014

हौसला देखें

एक लौ ने चिराग की सोचा, चलो यूँ भी कर देखें
अंधेरों में जलकर आज, अपने उजालों का असर देखें
इस स्याह रात से जीत पाना, यकीनन मुश्किल तो है
हार क्या जीत क्या, चलो अपना जिगर देखें

© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ

स्याह=काली


No comments:

Post a Comment