नित नये काव्य सृजन करें
नित निवृत हो निज ज्ञान
हे धवल वस्त्र धारिणी माँ
हमें दीजिये यह वरदान
सशक्त सत्य से परिपूर्ण
दो लेखनी दीप समान
अंधकार मिटे अज्ञान का
मिटे असत्य का अभिमान
वाणी का श्रृंगार करो माँ
स्वर वीणा का करो प्रदान
शब्द सरगम के संगम से
गीत सदैव हम रचें महान
साहस शील स्नेह ह्रदय में
त्याग और तप रहे प्रधान
परिष्कृत चिंतन को कर दो
विद्या दायिनी तुम्हे प्रणाम
© Copyright Regd. - प्रशांत सेठ
नित निवृत हो निज ज्ञान
हे धवल वस्त्र धारिणी माँ
हमें दीजिये यह वरदान
सशक्त सत्य से परिपूर्ण
दो लेखनी दीप समान
अंधकार मिटे अज्ञान का
मिटे असत्य का अभिमान
वाणी का श्रृंगार करो माँ
स्वर वीणा का करो प्रदान
शब्द सरगम के संगम से
गीत सदैव हम रचें महान
साहस शील स्नेह ह्रदय में
त्याग और तप रहे प्रधान
परिष्कृत चिंतन को कर दो
विद्या दायिनी तुम्हे प्रणाम
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