माँ तुझे सलाम
सर पर उम्मीदों का सूरज
अधरों पर खिलती मुस्कान
देखो हाथ थामे कल का
तनकर चल रहा वर्तमान
अभावों की इस टोकरी में
शेष बहुत से सपने हैं
बांध लिए आँचल में उसने
भाव हृदय में जितने हैं
हंसती है लाली चेहरे की
राह की उड़ती धूल पे
रीझ गई है खुद ही डाली
अपने खिले फूल पे
दुनिया भर के अवरोधों से
राह ना उसकी रुक पाएगी
देखना इसके सपनों को
एक दिन मंज़िल मिल जाएगी
वो जननी है उसके आगे
आसमान भी झुक जाते हैं
एक दिवस उमड़ी श्रद्धा से
ऋण नहीं ये चुक पाते हैं
© - प्रशांत सेठ
Very beautiful thought....
ReplyDeleteThanks Manjri
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