Monday, May 11, 2020

माँ तुझे सलाम

सर पर उम्मीदों का सूरज
अधरों पर खिलती मुस्कान
देखो हाथ थामे कल का
तनकर चल रहा वर्तमान

अभावों की इस टोकरी में
शेष बहुत से सपने हैं
बांध लिए आँचल में उसने
भाव हृदय में जितने हैं

हंसती है लाली चेहरे की
राह की उड़ती धूल पे
रीझ गई है खुद ही डाली
अपने खिले फूल पे

दुनिया भर के अवरोधों से
राह ना उसकी रुक पाएगी
देखना इसके सपनों को
एक दिन मंज़िल मिल जाएगी

वो जननी है उसके आगे
आसमान भी झुक जाते हैं
एक दिवस उमड़ी श्रद्धा से
ऋण नहीं ये चुक पाते हैं

© - प्रशांत सेठ

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