Sunday, September 8, 2019

हे सत्य के वाहक !!

मैं देखता रहा उम्र भर
तुम्हें जीते हुए
ठीक उसी समय जी रहा था
घुट घुट कर, कोई और
तुम्हारे मन के भीतर
तुम्हारा सत्य

अभिव्यक्ति
मर जाती है कई बार
व्यक्त हुए बिना ही
व्यक्ति के भीतर ...
जैसे गर्भ में ही मर जाया करती हैं
अजन्मी बेटियाँ

सत्य
मर जाता है अक्सर
जब खोखले शब्द उठा लेते हैं दायित्व
उसे जन्म देने का ...
अंधत्व और
"ओढ़े हुए अंधत्व" के संयोग से जैसे
उत्पन्न हो जाया करता है
दुर्योधन

अभिव्यक्ति
पा लेती है पूर्णता
जब अहंकारी सींखचों में कैद
प्रतिकूलताओं की बेड़ियों में जकड़ी
धर्म की देवकी करती है संकल्प
उसे जन्म देने का
और साहस का वसुदेव
निष्काम कर्म की टोकरी में रख
पहुँचा देता है उसे
जीवन के थपेड़ों से उस पार ...
प्रेम की यशोदा की गोद में
बाबा (आ)नंद के आँगन में
ज्ञान रूप गोकुल में
अनुभूति के वृंदावन में

© - प्रशांत सेठ


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