वेद पुराण गीता कुरान
शायद फिर से पढ़ना होगा
धर्म वही नई दृष्टि से अब
कदाचित फिर से गढ़ना होगा
निंदा करना सरल है किंतु
निंदा का यह सूत्र तो मानें
वंदित को जानें ना जानें
निंदित को अवश्य पहचानें
प्रकाश को समझना है तो
गहरे तम को पढ़ना होगा
मैं बड़ा हूँ, वह छोटा है
मन ने कितने वहम हैं पाले
मेरा कथन ही अंतिम सत्य है
बुद्धि पर ये अहं के ताले
दुनिया से क्या जूझ रहे हो
पहले खुद से लड़ना होगा
अपनी समझ का नित विस्तार
ना करे वो छात्र नहीं है
ग्रहण करो या करो निस्तार
ज्ञान बड़ा है, पात्र नहीं है
जड़ता के जो पोषक, उनको
ठहरे जल सा सड़ना होगा
मन शैतान मन फरिश्ता
मानव तेरा मर्म यही है
जीव का जीवों से रिश्ता
जो बतला दे धर्म वही है
करुणा के धागे से सबको
एक सूत्र में जुड़ना होगा
वेदों में विज्ञान को देखा
कुरान में शिव का स्वरूप
बहुत गहन है अगर मानो तो
कण कण है उसका ही रूप
अर्ध सत्य स्वीकार किया तो
भ्रम में फिर फिर पड़ना होगा
मुक्त होने को तत्पर मन हो
जब अपनी ही ग्रंथियों से
सनातन सत्य की राह चलना
मोह ना रखना पंथियों से
अज्ञात को पाना चाहो तो
ज्ञात से आगे बढ़ना होगा
© - प्रशांत सेठ

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