आज बस यूँ ही खुद पर प्यार आ गया !!!
हाँ, कठिन है पलते रहना
जीवन का उसूलों में
किन्तु असंभव भी नहीं है
फूल सा खिलना शूलों में
साहस निश्चित है जरूरी
राह सत्य की चलने में
दृढ संकल्प चाहिये मन में
गिरकर फिर सँभलने में
एक सबक छुपा होता है
अक्सर अपनी भूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
पर्वत की चोटी पर हैं तो
कभी खड़े ढलानों पर
प्रशंसा में रहे इतराते
दुःखी हुये उलाहनों पर
है आनंद कितना लेकिन
समय के इन झूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
होते हैं कुछ लोग यकीनन
बैसाखी पर टिके हुये
सरल मार्ग को चुनने वाले
रोम रोम तक बिके हुये
अवसरवादी ही मिलेंगे
झुकते चरण धूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
बस यही एक सूत्र मिला है
खुद से सच्चे रहो सदा
लाख बड़े हो जाओ फिर भी
भीतर बच्चे रहो सदा
मौलिकता मत खो देना
भगत बने बगूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
सोने नहीं देता ये जो
आँखों में स्वप्न पड़ा है
थकने नहीं देता हमको
लक्ष्य जीवन का बड़ा है
रोक सकें ये साहस कहाँ
पथ के इन बबूलों में
हां, असंभव भी नहीं ....
© - प्रशांत सेठ

हाँ, कठिन है पलते रहना
जीवन का उसूलों में
किन्तु असंभव भी नहीं है
फूल सा खिलना शूलों में
साहस निश्चित है जरूरी
राह सत्य की चलने में
दृढ संकल्प चाहिये मन में
गिरकर फिर सँभलने में
एक सबक छुपा होता है
अक्सर अपनी भूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
पर्वत की चोटी पर हैं तो
कभी खड़े ढलानों पर
प्रशंसा में रहे इतराते
दुःखी हुये उलाहनों पर
है आनंद कितना लेकिन
समय के इन झूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
होते हैं कुछ लोग यकीनन
बैसाखी पर टिके हुये
सरल मार्ग को चुनने वाले
रोम रोम तक बिके हुये
अवसरवादी ही मिलेंगे
झुकते चरण धूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
बस यही एक सूत्र मिला है
खुद से सच्चे रहो सदा
लाख बड़े हो जाओ फिर भी
भीतर बच्चे रहो सदा
मौलिकता मत खो देना
भगत बने बगूलों में
हाँ, असंभव भी नहीं ....
सोने नहीं देता ये जो
आँखों में स्वप्न पड़ा है
थकने नहीं देता हमको
लक्ष्य जीवन का बड़ा है
रोक सकें ये साहस कहाँ
पथ के इन बबूलों में
हां, असंभव भी नहीं ....
© - प्रशांत सेठ

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