कौन कहता है पिता जन्म नहीं देता। मातृत्व का अर्थ यदि संतान को जन्म देना है तो संतान के ह्रदय में आशा और साहस को निरंतर जन्म देना ही पितृत्व है।
पितृत्व का दायित्व निभाते हुए जन्मी यह रचना समर्पित है उन सभी बच्चों को जिनकी परीक्षाओं का परिणाम आशा के अनुरूप नहीं है। इस संदेश के साथ की लगनशील व्यक्ति के जीवन में विफलता जैसी कोई चीज़ नहीं होती क्योंकि कभी आप लक्ष्य प्राप्त कर रहे होते हैं तो कभी ज्ञान।
बस एक कदम और...
विफलता से ले सबक तुम
बाधाओं को चूर करो
अपनी कमियों को पहचानो
फिर उनको तुम दूर करो
मन के रथ को तुम अपने
श्रम के अश्व से खींचो तो
पसीने की बूंदों से निज
स्वप्न की बगिया सींचो तो
अवरोधों का पर्वत तोड़ो
स्वयं को मज़दूर करो
विफलता से....
सुख छाँव का तब जानोगे
जब देखी हो तपती धूप
मन में ये चिंतन रखो तो
विफलता है ज्ञान स्वरुप
शंकाओं को, हर डर को
जीवन से काफूर करो
विफलता से....
प्रथम प्रयास में तीर कोई
लक्ष्य नहीं भेद पाता है
सतत परिश्रम से धनुर्धर
अर्जुन सा बन जाता है
क्षणिक सुख का मोह त्यागो
नित्य साधना ज़रूर करो
विफलता से....
एक ठोकर से धावक की
दौड़ नहीं रुक जाती है
एक पराजय से वीर की
ग्रीवा नहीं झुक जाती है
दो कदम पीछे हटकर
प्रहार फिर भरपूर करो
विफलता से....
वर्तमान यदि विफल हुआ है
तो उसको हो जाने दो
स्वप्न कल का किन्तु आँख से
तुम अपनी मत जाने दो
दूनी क्षमता और लगन से
पुनः प्रयत्न जरूर करो
विफलता से....
विषमता से लड़कर पहले
बल का अर्जन करता है
बीज कोई अथक श्रम से
नव सृजन तब करता है
कल के वृक्ष, पूरा तुम भी
सृष्टि का दस्तूर करो
विफलता से....
टेढ़े मेढ़े दुर्गम पथ पर
निराशा मन में छाये जब
दूर दूर तक राह कहीं भी
दृष्टि में ना आये तब
लक्ष्य को आराध्य बनाओ
अंतर्मन को सूर करो
विफलता से....
कड़ी धूप के बाद मिलती
बारिश की ठंडी फुहार है
घुमड़ घुमड़ कर मेघ कहते
देखो सावन तैयार है
पंख फैलाओ सतरंगी तुम
और मन को मयूर करो
विफलता से....
© - प्रशांत सेठ
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