है जब तलक यहाँ बसर जिंदगी
तू मेरी मैं तेरा हमसफ़र जिंदगी
तू मेरी मैं तेरा हमसफ़र जिंदगी
चिराग हो ज्यूँ आँधियों से मुखातिब
जलेगी कब तक क्या खबर जिंदगी
जलेगी कब तक क्या खबर जिंदगी
एक सांस ली एक छोड़ दी जैसे
कभी बाहर कभी अन्दर जिंदगी
कभी बाहर कभी अन्दर जिंदगी
पत्थरों पर बहते दरिया सी आज
है कल का ये कोई समंदर जिंदगी
है कल का ये कोई समंदर जिंदगी
वीराने में खिले किसी गुल के मानिंद
तन्हाईयों का जैसे एक घर जिंदगी
तन्हाईयों का जैसे एक घर जिंदगी
समाती नहीं इसमें ख्वाहिशें सारी
हक़ीक़तों की छोटी चादर जिंदगी
हक़ीक़तों की छोटी चादर जिंदगी
धूप, छाँव, कभी बारिश का मौसम
है बहुत खूबसूरत मगर जिंदगी
है बहुत खूबसूरत मगर जिंदगी
© - प्रशांत सेठ
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